blogid : 129 postid : 151

एक राज लौटते हुए

Posted On: 23 Nov, 2012 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

राज है कि पथिक घर आया, ठहरा और एक सर्द अफसाने के साथ भोर के धुएं में जर्द हो गया।

राज है कि रात जो काली थी, डूबी थी अंधेरे की गर्त में, उसकी सुबह हो गई, दमक गई, चमक गई।

राज है कि न उसने कुछ बोला, न पथिक ने, मगर रात भर बातें होती रहीं, सुबह तो दोनों थक गए।

राज है कि जब सांकल बजा था तो कौन चौंका था, कौन उठा था और किसने दरवाजा खोला था।

राज है कि सांकल बजा भी था या नहीं, दरवाजा खुला भी था या नहीं, बाहर कोई था भी या नहीं।

राज है कि एक गर्मी आई थी, टकराई थी और चिपक गई थी दरवाजे से।

राज है कि किसके होंठ बढ़े, किसकी सांसें टकराईं, दास्तां अंधेरे से शुरू, अंधेरे में खत्म।

राज है कि सुबह आई, और भी आएंगी, पर रात लंबी हो गई, न बीती, न बीतेगी, नहीं, नहीं बीतेगी।

राज है कि लौटते हुए पथिक को दो जोड़ी आंखें रोक रही थीं, लब खामोशी की चादर ओढ़े थे।

राज है कि एक चेहरा बोल रहा था, पथिक सुन रहा था, कान जर्द थे और हृदय सर्द था।

राज है कि ठिठुरती जिंदगी कैसे कांपती टांगों के साथ भोर के धुएं में रफ्ता-रफ्ता खो गई थी।

राज है कि फिर पथिक कभी क्यों रास्ता नहीं भटका, कैसे बन बैठा वह इतना सावधान।

कैसे, राज है, है न राज??



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (5 votes, average: 4.60 out of 5)
Loading ... Loading ...

183 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Addrienne के द्वारा
July 20, 2016

This forum needed shinkag up and you’ve just done that. Great post!

Dhaninder के द्वारा
October 19, 2013

Excellent

mahipalsingh के द्वारा
March 22, 2013

R

graceluv के द्वारा
March 11, 2013

Hello Dear! My name is Grace, I saw your profile and would like to get in touch with you If you’re interested in me too then please send me a message as quickly as possible. (gracevaye22@hotmail.com) Greetings Grace




latest from jagran