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ना-ना, ना-ना...!

Posted On: 24 Mar, 2013 Others,मस्ती मालगाड़ी में

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डगर कहता है
जरा संभल ना
मगर कहता हूं
ना-ना, ना-ना…!

हिसाबों में हम
किताबों में हम
सवालों में हम
जवाबों में हम

जिगर कहता है
जरा मचल ना
मगर कहता हूं
ना-ना, ना-ना…!

ओ काली जुल्फें
नशीली आंखें
ये मस्त जवानी
बड़ी मस्तानी

शहर कहता है
जरा बदल ना
मगर कहता हूं
ना-ना, ना-ना…!

लंबी गलियां
ऊंची कलियां
टेढ़ी सड़कें
चलने ना दें

सफर कहता है
जरा सा रुक ना
मगर कहता हूं
ना-ना, ना-ना…!

सूना दफ्तर
पसीने से तर
नगीना घर है
कमीना बिस्तर

असर कहता है
जरा फिसल ना
मगर कहता हूं
ना-ना, ना-ना…!

सरेंडर दिन है
कैलेंडर रातें
मगर कहता हूं
ना-ना, ना-ना…!

होश में हैं लोग
जोश में हैं हम
मगर कहता हूं
ना-ना, ना-ना…!

लंबी राहें
पुकारें आ जा
मगर कहता हूं
ना-ना, ना-ना…!

बताए रस्ता
इधर से ही जा
मगर कहता हूं
ना-ना, ना-ना…!

कोई जो बोले
कि बोलो हां हां
मगर कहता हूं
ना-ना, ना-ना…!

ना-ना, ना-ना…!
ना-ना, ना-ना…!
ना-ना, ना-ना…!

होली की शुभकामनाओं के साथ



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ikshit के द्वारा
March 28, 2014

बड़ी गहरी उतर कर गयी है सोच सर जी… इच्छित

bdsingh के द्वारा
October 5, 2013

सरल शब्दों से एक सुन्दर रचना।

ravikant के द्वारा
June 30, 2013

भैया बहुत अच्‍छी कविता है। अति सुंदर…वाह… वाह

ml suryavanshi के द्वारा
May 25, 2013

BAHUT BADIYA


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